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बुधवार, जून 17, 2009

‘‘इस सुराज से तो अंग्रेजों का राज बहुत अच्छा था’’

आज के जमाने को देख-देखकर पुराने लोग बड़े हैरान हैं। वो अक्सर कहते हैं कि इस सुराज से तो अंग्रेजों का राज बहुत अच्छा था।

घटना आज से लगभग 80 वर्ष पुरानी होगी।

मेरे पिता जी अक्सर इस घटना को सुनाते हैं। नजीबाबाद से 5-6 किमी दूर श्रवणपुर के नाम से एक गाँव है। वहाँ मेरी बुआ जी रहतीं थी। उनके ससुर जी बड़े पराक्रमी थे। वो अपनी बिरादरी के जाने माने चैधरी थे।

उन दिनों अंग्रेजी शासन था। एक अंग्रेज आफीसर बग्घी में सवार होकर गाँव के कच्चे रास्ते से सैर करने जा रहा था। मेरी बुआ जी के ससुर ने उनको कहा कि इस रास्ते में आगे कीचड़ है। इसलिए अपनी बग्गी को आगे मत ले जाओ। नही तो कीचड़ में फँस जायेगी। लेकिन अंग्रेज नही माना और आगे बढ़ गया।

कुछ दूर पर कीचड़ में उसकी बग्घी फँस गयी। वो गाँव में आया और कुछ लोगो की मदद से अपनी बग्घी को कीचड़ में से निकलवा लाया।

अब वो सीधे मेरी बुआ जी के ससुर के पास आया और उनको 25 रुपये ईनाम स्वरूप भेंट किये। जिन्होंने उसकी बग्घी को कीचड़ से निकाला था उनको भी एक-एक रुपये का ईनाम दिया।

बाद में पता लगा कि यह आफीसर जिले का डिप्टी कलेक्टर था।

इस आफीसर ने सबसे पहला काम यह किया कि उस रोड को ऊँची करा कर उसमें खड़ंजा लगवाया।

पिता जी कहते हैं कि आज ऐसे आफीसर कहाँ हैं?

आज तो नेताओं से लेकर अधिरियों तक के मुँह खून लगा है। हर काम में कमीशन व रिश्वतखोरी का बोल-बाला है। न्याय तक में भी रिश्वत का ही सिक्का चलता है। इसीलिए गरीब आदमी को न्याय नही मिल पाता है।

इससे तो लाख गुना बेहतर अंग्रेजी राज था।

7 टिप्‍पणियां:

  1. mahoday ham bhi aapki baat se pure sahmat hain. hamare netaon ne angrejon ki keval buri baaten hi sikhi achhi baaten nahi sikhi .

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  2. aap sahi farmaate hain
    bada dukh hai ki ye sach hai...............

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  3. baat to kuch had tak sahi hai ki hamein achchi baatein bhi sikhni chahiye phir chahe wo hamara dushman hi kyun na ho.....achchi baat kisi se bhi sikhi ja sakti hai aur kabhi bhi......angrejon ne chahe kitne hi julm kiye hamare desh aur nagrikon par magar ye baat to kabil-e-tarif hai........isse sabko shiksha leni chahiye.

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  4. आज कल के हालात देख कर तो यही कहा जा सकता है.......आप की बात सही है.....अपनी आजादी का जब हम दुरुपयोग करेगें तो यही कहना पडे़गा....

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  5. गलत तुलना कर रहे हैं आप। उस जमाने और आज की नैतिकता में फर्क आ गया है। शासक वर्ग के एक दो लोगों के व्‍यवहार से नहीं संपूर्णता में उसमें बहुत बड़ा बदलाव आया है। यकीन न हो तो इराक और अफगानिस्‍तान में अंग्रेज बहुत हैं। उनके कारनामे पता कीजिए। आज अगर अंग्रेज हमारे यहां हों तो हम भी इराक के लोगों की तरह उन्‍हें भगाने के लिए लड़ रहे होते।

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  6. आजादी तो सब को भाती है, लेकिन आज हम आजाद है ?? यह हमारी भुल है, अग्रेजॊ के समय कानून था , ओर आज हमारे यहां जंगल का कानून है वरना हमारे देश मै किसी चीज की कमी नही.... काश एक हिटलर आये ओर १०,१५ साल मे सारी गन्दगी हटा दे. कोई ओर दुसरा रास्ता नही इस गन्दगी कॊ साफ़ करने के लिये

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  7. राज भाटियाजी ने सही कहा है कोई कानून नहीं है। लेकिन इसकी वजह क्‍या है। इसकी वजह है सार्वजनिक जीवन में बढ़ता भ्रष्‍टाचार और उससे भी पहले समाज में जारी पैसों की होड़। यह समाज पैसों पर टिका है। इस व्‍यवस्‍था का शुद्ध राजनीतिक नाम पूंजीवाद है। पूंजीवाद खुद पैसों की होड़ शुरू करता है। लेकिन एक सीमा के बाद यह होड़ हर काम, व्‍यवस्‍था, कानून को तोड़ने-मरोड़ने लगती है। इसलिए यह समझना कि हिटलर आ जाएगा तो कोई समाधान हो जाएगा निरी बेवकूफी है। हिटलर इस समस्‍या का एक नया ही समाधान बताता है। उसके अनुसार इस सारी अव्‍यवस्‍था का कारण एक खास कौम या समुदाय है। क्‍या आप समस्‍या की जड़ यानी पैसों की अंधी होड़ को खत्‍म करना चाहेंगे या हिटलर के अनुसार किसी खास कौम या समुदाय को? किसी विचार को समर्थन करने से पहले समस्‍या की जड़ और उस खास विचार के बारे में जान लेना अच्‍छा रहता है। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हिटलर का नाम मानवता के दुश्‍मन के रूप में इतिहास में दर्ज है।

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कृपया नापतोल.कॉम से कोई सामन न खरीदें।

मैंने Napptol.com को Order number- 5642977
order date- 23-12-1012 को xelectron resistive SIM calling tablet WS777 का आर्डर किया था। जिसकी डिलीवरी मुझे Delivery date- 11-01-2013 को प्राप्त हुई। इस टैब-पी.सी में मुझे निम्न कमियाँ मिली-
1- Camera is not working.
2- U-Tube is not working.
3- Skype is not working.
4- Google Map is not working.
5- Navigation is not working.
6- in this product found only one camera. Back side camera is not in this product. but product advertisement says this product has 2 cameras.
7- Wi-Fi singals quality is very poor.
8- The battery charger of this product (xelectron resistive SIM calling tablet WS777) has stopped work dated 12-01-2013 3p.m. 9- So this product is useless to me.
10- Napptol.com cheating me.
विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
मैंने इस पर एक आलेख अपने ब्लॉग "धरा के रंग" पर लगाया था!

"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....
--
मान्यवर,
मैंने आपको चेतावनी दी थी कि यदि आप 15 दिनों के भीतर मेरा प्रोड्कट नहीं बदलेंगे तो मैं
अपने सभी 21 ब्लॉग्स पर आपका पर्दाफास करूँगा।
यह अवधि 26 जनवरी 2013 को समाप्त हो रही है।
अतः 27 जनवरी को मैं अपने सभी ब्लॉगों और अपनी फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, ऑरकुट पर
आपके घटिया समान बेचने
और भारत की भोली-भाली जनता को ठगने का विज्ञापन प्रकाशित करूँगा।
जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
इत्तला जानें।