समर्थक

शनिवार, जून 06, 2009

‘‘पाप का बाप कौन?’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आतंकवादी सीमा पार से आते हैं, कुछ पकड़े जाते है और कुछ मारे जाते हैं। कुछ जघन्य काण्ड करने में सफल भी हो जाते हैं। आखिर ये इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाते हैं?

एक झील के किनारे एक आम का पेड़ था। उस पेड़ पर एक बन्दर रहता था और झील में एक मगरमच्छ अपनी पत्नी के साथ रहता था।

जब पेड़ पर आम के फल आते थे तो बन्दर उन फलों को खाता था। कुछ आम वो झील में भी गिरा देता था। जिन्हें मगरमच्छ बड़े चाव से खाता था।

धीरे-धीरे वो दोनों अच्छे मित्र बन गये। एक दिन मगरमच्छ ने कुछ आम अपनी पत्नी को भी दिये। आम बहुत मीठे और रसीले थे । मगरमच्छ की पत्नी को वो बहुत अच्छे लगे। उसने अपने पति से कहा कि ये बन्दर इतने मीठे आम खाता है तो इसका दिल तो बहुत मीठा होगा।

उसने मगरमच्छ से कहा- ‘‘मैं तो अब बन्दर का दिल खाकर ही मानूँगी। अन्यथा अपने प्राण त्याग दूँगी’’

मगरमच्छ ने अपनी पत्नी से कहा- "बन्दर हमारा मित्र है हमें उसके साथ ऐसा सुलूक नही करना चाहिए।"

किन्तु पत्नी की हठ के आगे मगरमच्छ की एक न चली। अतः वह बन्दर को अपनी पत्नी के सामने लाने के लिए तैयार हो गया।

वह दुखी मन से बन्दर के पास गया और उससे कहने लगा- ‘‘मित्र! तुम रोज ही हमें मीठे आम खाने को देते हो। आज हमारी पत्नी ने तुम्हारी दावत की है।’’

बन्दर ने मगरमच्छ की दावत स्वीकार कर ली और वो मगरमच्छ की पीठ पर सवार हो गया।

जैसे ही मगरमच्छ बीच झील में पहुँचा तो उसने बन्दर से कहा कि मित्र तुम बहुत मीठे-मीठे आम खाते हो। तुम्हारा दिल तो बहुत मीठा होगा। आज मेरी पत्नी तुम्हारा दिल खाना चाहती है।

बन्दर ने इस विपत्ति के समय अपना धैर्य नही खोया और वह तुरन्त मगरमच्छ से बोला- ‘‘मित्र! आपने पहले क्यों नही बताया? हम तो उछल-कूद करने वाले प्राणी ठहरे। दिल को झटका न लगे। इसलिए अपने दिल को पेड़ पर ही टाँग देते है। यदि मेरा दिल चाहिए तो मुझे वापिस पेड़ के पास ले चलो। मैं अपना दिल साथ में ले आता हूँ।’’

मूर्ख मगरमच्छ ने बन्दर की बात पर विश्वास कर लिया और उसे जैसे ही पेड़ के पास लाया। बन्दर ने छलांग लगाई और पेड़ पर चढ़ गया।

बन्दर ने मगरमच्छ से कहा- "मूर्ख! कहीं दिल भी पेड़ पर लटका करते हैं।"

कहने का तात्पर्य यह है कि पाप का बाप लोभ होता है।

एक ओर तो मगरमच्छ और उसकी पत्नी को बन्दर खाने का लोभ था तो दूसरी ओर बन्दर को दावत खाने का लोभ था।

दूसरी शिक्षा इस कहानी से यह मिलती है कि यदि प्राण संकट में भी हों तो धैर्य और बुद्धि से काम लेना चाहिए।

अब तो आप समझ ही गये होंगे कि ‘‘पाप का बाप कौन होता है।’’

5 टिप्‍पणियां:

  1. waah waah
    chalo ek naya doha rachte hain :
    paap lobh ka putra hai, lobh paap ka baap
    isee baap k karan jag me faila hai santaap
    SIYAVAR RAAMCHANDRA KI JAY

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत प्रेरक प्रसंग है।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. kuchh baatein saamjh me aayee par zara confusion bhi ho gaya...bhaav itna spasht nahi hai...

    www.pyasasajal.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

कृपया नापतोल.कॉम से कोई सामन न खरीदें।

मैंने Napptol.com को Order number- 5642977
order date- 23-12-1012 को xelectron resistive SIM calling tablet WS777 का आर्डर किया था। जिसकी डिलीवरी मुझे Delivery date- 11-01-2013 को प्राप्त हुई। इस टैब-पी.सी में मुझे निम्न कमियाँ मिली-
1- Camera is not working.
2- U-Tube is not working.
3- Skype is not working.
4- Google Map is not working.
5- Navigation is not working.
6- in this product found only one camera. Back side camera is not in this product. but product advertisement says this product has 2 cameras.
7- Wi-Fi singals quality is very poor.
8- The battery charger of this product (xelectron resistive SIM calling tablet WS777) has stopped work dated 12-01-2013 3p.m. 9- So this product is useless to me.
10- Napptol.com cheating me.
विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
मैंने इस पर एक आलेख अपने ब्लॉग "धरा के रंग" पर लगाया था!

"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....
--
मान्यवर,
मैंने आपको चेतावनी दी थी कि यदि आप 15 दिनों के भीतर मेरा प्रोड्कट नहीं बदलेंगे तो मैं
अपने सभी 21 ब्लॉग्स पर आपका पर्दाफास करूँगा।
यह अवधि 26 जनवरी 2013 को समाप्त हो रही है।
अतः 27 जनवरी को मैं अपने सभी ब्लॉगों और अपनी फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, ऑरकुट पर
आपके घटिया समान बेचने
और भारत की भोली-भाली जनता को ठगने का विज्ञापन प्रकाशित करूँगा।
जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
इत्तला जानें।