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शुक्रवार, मई 22, 2009

‘‘न्याय मिलता तो है?’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सन् 2002 का वाकया है। मेरे बड़े पुत्र नितिन ने कम्प्यूटर मिक्सिंग लैब की शुरूआत की थी। उसके लिए आन-लाइन डिजिटल मिक्सर खरीदने के लिए मैं दिल्ली गया।

जोना फोटो, चाँदनी चौक से यह मिक्सर खरीदा गया। उसका आदमी इसे लगाने के लिए खटीमा आया। लेकिन इसकी क्वालिटी बहुत ही घटिया दर्जे की थी।

मैने फोन से जोना फोटो से इसे बदलने के लिए निवेदन किया। परन्तु वह नही माना।

बाध्य होकर मुझे इसके खिलाफ उपभोक्ता फोरम में केस रजिसटर कराना पड़ा।

डेढ़ साल तक तारीखें पड़ती रही और केस हमारे पक्ष में हो गया।

अब पैसा वसूलने की बारी थी।

प्रतिवादी ने समय अवधि में पैसा नही दिया तो पुनः फोरम से निवेदन करना पड़ा।

फोरम ने इस पर संज्ञान लेते हुए कुर्की वारण्ट जारी कर दिये। प्रतिवादी ने अब फोरम में अपना वकील भेज दिया था। मामला फिर अधर मे लटक गया।

इस प्रक्रिया में एक साल और निकल गया।

खैर, निर्णय हमारे ही पक्ष में रहा। लेकिन प्रतिवादी ने इसकी अपील राज्य उपभोक्ता संरक्षण फोरम में कर दी। वहाँ भी केस डेढ़ साल तक चला। अन्त में निचली अदालत के निर्णय को बर करार रखा गया।

इसके बाद निचली अदालत से पुनः पैसा दिलाने की गुहार लगाई गयी।

जैसे-तैसे इकसठ हजार पर ब्याज मिला कर सतासी हजार के लगभग रुपये मिल गये। परन्तु पाँच साल तक केस चलता रहा, पचास हजार रुपये बरबाद हुए, शारीरिक और मानसिक परेशानी अलग रहीं।

प्रश्न यह उठता है कि क्या हर एक उपभोक्ता न्यायालय जायेगा?

यदि गया भी तो क्या पाँच वर्ष से अधिक तक मुकदमा झेल पायेगा?

एक बात तो इससे स्पष्ट हो गयी है कि आम आदमी को न्याय कभी नसीब नही होगा।

5 टिप्‍पणियां:

  1. apne bilkul sahi kaha hai aise kitane hi udahran dekhe ja sakte hain mujhe apni pansion milane mai ek sal laga agar mai mehakme par case karoon to jitna mujhe nuksan hua vo mil ssakta hai magar utane hi vakeel le lega fir is umar me kaun dhake khaaye yahan agar mai rishvat de deti to shayad apna ek saal ka interest bacha leti magar ye rishvat dena mujhe gavara nahin thha so is system se ladne me badi pareshani hai abhar

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  2. der se mila nyaay bhi anyaay ban jata hai.........sahi kaha gaya hai.har koi itni jahmat nhi utha sakta jitni aapne uthayi.aaj logon ke paas samay kam hai aur pareshaniyan isse kai guna jyada agar aise mein wo nyaay chahe to uski mansik shanti bhi bhang ho jayegi.......kyunki hamari nyaay prakriya bahut hi jatil hai jismein itna time nikal jata hai kai baar to insaan khatam ho jata hai aur nyaay nhi mil pata phir aam insaan kaise itni himmat juta sakta hai.

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  3. हमारे सुर में सुर मिलाइए, अदालतें बढ़वाने को आवाज लगाइए।

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  4. ji haa,
    main aap se sahmat hoo.par dunesh ji ki baat bhi ekdam thik hai.har nyaalayay me adhikaariyo,judges ki sankhyaa kam hai..case ke anurup inde badhana hoga tabhi nyay ho sakega...

    उत्तर देंहटाएं
  5. मेरे विचार से तो इन झमेलों से जहाँ तक हो सके बचना चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं

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कृपया नापतोल.कॉम से कोई सामन न खरीदें।

मैंने Napptol.com को Order number- 5642977
order date- 23-12-1012 को xelectron resistive SIM calling tablet WS777 का आर्डर किया था। जिसकी डिलीवरी मुझे Delivery date- 11-01-2013 को प्राप्त हुई। इस टैब-पी.सी में मुझे निम्न कमियाँ मिली-
1- Camera is not working.
2- U-Tube is not working.
3- Skype is not working.
4- Google Map is not working.
5- Navigation is not working.
6- in this product found only one camera. Back side camera is not in this product. but product advertisement says this product has 2 cameras.
7- Wi-Fi singals quality is very poor.
8- The battery charger of this product (xelectron resistive SIM calling tablet WS777) has stopped work dated 12-01-2013 3p.m. 9- So this product is useless to me.
10- Napptol.com cheating me.
विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
मैंने इस पर एक आलेख अपने ब्लॉग "धरा के रंग" पर लगाया था!

"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....
--
मान्यवर,
मैंने आपको चेतावनी दी थी कि यदि आप 15 दिनों के भीतर मेरा प्रोड्कट नहीं बदलेंगे तो मैं
अपने सभी 21 ब्लॉग्स पर आपका पर्दाफास करूँगा।
यह अवधि 26 जनवरी 2013 को समाप्त हो रही है।
अतः 27 जनवरी को मैं अपने सभी ब्लॉगों और अपनी फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, ऑरकुट पर
आपके घटिया समान बेचने
और भारत की भोली-भाली जनता को ठगने का विज्ञापन प्रकाशित करूँगा।
जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
इत्तला जानें।