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शनिवार, मई 22, 2010

बाबा नागार्जुन का एक रूप ऐसा भी- (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)

“बाबा नागार्जुन की संस्मरण शृंखला-7”

चित्र में- (खड़े हुए) टीकाराम पाण्डेय एकाकी
(चारपाई पर बैठे हुए)
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक", बाबा नागार्जुन, देवदत्त प्रसून     
 इस संस्मरण को लिखने का मेरा उद्देश्य है कि बाबा नागार्जुन के मन में कहीं यह जरूर छिपा हुआ था कि देश के भावी कर्णधार शिक्षित हों। भारत अन्य देशों की तुलना में शिक्षा में पिछड़ा हुआ न हो। साथ ही विद्यार्थियों को इससे प्रेरणा भी मिले कि उन्हें परीक्षा में प्रथम-श्रेणी उत्तीर्ण होना चाहिए। शायद यही प्रेरणा उस महान विभूति की थी कि मेरा बड़ा पुत्र हाई-स्कूल के बाद इण्टर में भी प्रथम श्रेणी मे ही पास हुआ।
आज बाबा को साथ लेकर जाना था पीलीभीत जिले के मझोला कस्बे में। मझोला कस्बे में को-आपरेटिव शुगर फैक्ट्री में एक साहित्य विभाग भी था। यह विभाग बनवाने में पीलीभीत के महान साहित्य-सेवी स्व0 रोशन लाल शर्मा का योगदान था। इसके पीछे उनकी यह सोच थी कि इससे किसी गरीब साहित्यकार के बच्चों और उसके परिवार का पेट-पालन होगा और दूसरी बात यह थी कि फैक्ट्री की स्टेशनरी की खरीद-फरोख्त, उसकी प्रिंटिंग तथा पत्र पत्रिकाओं में फैक्ट्री के विरुद्ध या अनुकूल जो कुछ छप रहा है, उस पर दृष्टि रखना व उसका जवाब देना।
इसी शुगर फैक्ट्री में एक मदन विरक्त भी थे। उन दिनों वे इसके साहित्य विभाग में सम्पादक के पद पर नियुक्त थे। वे बाबा से बहुत लगाव रखते थे। एक दिन वे भी बाबा से मिलने के लिए आये। बाबा से बतियाते रहे और मझोला शुगर फैक्ट्री में कवि-गोष्ठी आयोजित करने के लिए बाबा से अनुमति ले ली।
रविवार के दिन मझोला शुगर फैक्ट्री के गेस्ट-हाउस में गोष्ठी निश्चित हो गयी। बाबा के सुझाव पर गोष्ठी भी ऐसी वैसी नही उच्च-कोटि की रखी गयी। बाबा ने कहा था कि गोष्ठी में क्षेत्र के उन सभी विद्यार्थियों को बुलाना है जिन्होंने 10वीं या 12वीं की परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त की हो। बस अपनी मार्क-शीट की फोटो स्टेट कापी जमा करनी होगी। शुगर फैक्ट्री की ओर से इन सब विद्यार्थियों को पुरस्कार भी बाबा के ही कर-कमलों से दिलवाया गया। मेरे ज्येष्ठ-पुत्र नितिन को भी हाई-स्कूल में प्रथम श्रेणी लाने पर एक कांस्य मैडल व प्रमाण पत्र बाबा के कर कमलों से दिया गया था।
गोष्ठी में टीकाराम पाण्डेय एकाकी, देवदत्त प्रसून, वाचस्पति जी, डा0 शम्भू शरण अवस्थी, गेन्दालाल शर्मा निर्जन, डा।रूपचन्द्र शास्त्री मयंक, ध्रुव सिंह धु्रव, रवीन्द्र पपीहा, रामदेव आर्य, मदन विरक्त, फैक्ट्री के तत्कालीन प्रशासक (जिलाधिकारी-पीलीभीत),विजय कुमार, खूबसिंह विकल, अम्बरीश कुमार आदि ने भाग लिया।
गोष्ठी के संयोजक मदन विरक्त ने तो -
‘‘वीरों की माता हूँ, वीरों की बहना।
पत्नी उस वीर की हूँ, शस्त्र जिसका गहना।’’
का सस्वर पाठ किया। जिसकी बाबा ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
इसके बाद बाबा ने अपनी रचना-
‘अकाल और उसके बाद’ का पाठ किया और
इसकी एक-एक लाइन की व्याख्या करके सुनाई।
कई दिनो तक चूल्हा रोया,
चक्की रही उदास,
कई दिनों तक कानी कुतिया,
 सोई उनके पास,
कई दिनों तक लगी भीत पर,
 छिपकलियों की गश्त,
कई दिनों तक चूहों की भी,
 हालत रही शिकश्त।
दाने आए घर के अंदर,
कई दिनों के बाद,
धुआँ उठा आँगन से ऊपर,
कई दिनों के बाद,
चमक उठी घर भर की आँखें,
कई दिनों के बाद,
कौए ने खुजलाई पाँखें,
कई दिनों के बाद।

5 टिप्‍पणियां:

  1. बाबा नागार्जुन से जुड़ी बातें आप भी धीरे-धीरे से मिठाई के डिब्बे की तरह खोल रहे हैं...ताकि लोग ज़्यादा चटखारे ले-ले कर आनंद उठाएं :)

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. आप लोग मेरी वजह से ब्लागर मीट में आने का कार्यक्रम न छोड़े. वह तो अविनाश वाचस्पति साहब ने ही अपनी पोस्ट में लिखा था कि जलजला मौजूद रहेगा इसलिए मैं दिल्ली पहुंच गया था. अब लौट रहा हूं. आप सभी लोग लाल-पीली-नीली जिस तरह की टीशर्ट संदूक से मिले वह पहनकर कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं.
    यह दुनिया बड़ी विचित्र है..... पहले तो कहते हैं कि सामने आओ... सामने आओ, और फिर जब कोई सामने आने के लिए तैयार हो जाता है तो कहते हैं हम नहीं आएंगे. जरा दिल से सोचिएगा कि मैंने अब तक किसी को क्या नुकसान पहुंचाया है. किसकी भैंस खोल दी है। आप लोग न अच्छा मजाक सह सकते हैं और न ही आप लोगों को सच अच्छा लगता है.जलजला ने अपनी किसी भी टिप्पणी में किसी की अवमानना करने का प्रयास कभी नहीं किया. मैं तो आप सब लोगों को जानता हूं लेकिन मुझे जाने बगैर आप लोगों ने मुझे फिरकापरस्त, पिलपिला, पानी का जला, बुलबुला और भी न जाने कितनी विचित्र किस्म की गालियां दी है. क्या मेरा अपराध सिर्फ यही है कि मैंने ज्ञानचंद विवाद से आप लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास किया। क्या मेरा अपराध यही है कि मैंने सम्मान देने की बात कही. क्या मेरा यह प्रयास लोगों के दिलों में नफरत का बीज बोने का प्रयास है. क्या इतने कमजोर है आप लोग कि आप लोगों का मन भारी हो जाएगा. जलजला भी इसी देश का नागरिक है और बीमार तो कतई नहीं है कि उसे रांची भेजने की जरूरत पड़े. आप लोगों की एक बार फिर से शुभकामनाएं. मेरा यकीन मानिए मैं सम्मेलन को हर हाल में सफल होते हुए ही देखना चाहता हूं. आप सब यदि मुझे सम्मेलन में सबसे अंत में श्रद्धाजंलि देते हुए याद करेंगे तो मैं आपका आभारी रहूंगा. मैं लाल टीशर्ट पहनकर आया था और अपनी काली कार से वापस जा रहा हूं. मेरा लैपटाप मेरा साथ दे रहा है.

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  4. बढ़िया पोस्ट! बहुत अच्छा लगा जानकर बाबा नागार्जुन से जुडी बातें !

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केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

कृपया नापतोल.कॉम से कोई सामन न खरीदें।

मैंने Napptol.com को Order number- 5642977
order date- 23-12-1012 को xelectron resistive SIM calling tablet WS777 का आर्डर किया था। जिसकी डिलीवरी मुझे Delivery date- 11-01-2013 को प्राप्त हुई। इस टैब-पी.सी में मुझे निम्न कमियाँ मिली-
1- Camera is not working.
2- U-Tube is not working.
3- Skype is not working.
4- Google Map is not working.
5- Navigation is not working.
6- in this product found only one camera. Back side camera is not in this product. but product advertisement says this product has 2 cameras.
7- Wi-Fi singals quality is very poor.
8- The battery charger of this product (xelectron resistive SIM calling tablet WS777) has stopped work dated 12-01-2013 3p.m. 9- So this product is useless to me.
10- Napptol.com cheating me.
विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
मैंने इस पर एक आलेख अपने ब्लॉग "धरा के रंग" पर लगाया था!

"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....
--
मान्यवर,
मैंने आपको चेतावनी दी थी कि यदि आप 15 दिनों के भीतर मेरा प्रोड्कट नहीं बदलेंगे तो मैं
अपने सभी 21 ब्लॉग्स पर आपका पर्दाफास करूँगा।
यह अवधि 26 जनवरी 2013 को समाप्त हो रही है।
अतः 27 जनवरी को मैं अपने सभी ब्लॉगों और अपनी फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, ऑरकुट पर
आपके घटिया समान बेचने
और भारत की भोली-भाली जनता को ठगने का विज्ञापन प्रकाशित करूँगा।
जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
इत्तला जानें।