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शनिवार, फ़रवरी 20, 2010

“दोहा लिखिएः वार्तालाप” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


“धुरन्धर साहित्यकार”

वार्तालाप

आज मेरे एक “धुरन्धर साहित्यकार” मित्र की चैट आई-
धुरन्धर साहित्यकार- शास्त्री जी नमस्कार!
मैं- नमस्कार जी!
धुरन्धर साहित्यकार- शास्त्री जी मैंने एक रचना लिखी है, देखिए! मैं- जी अभी देखता हूँ!
(दो मिनट के् बाद)
धुरन्धर साहित्यकार- सर! आपने मेरी रचना देखी!
मैं- जी देखी तो है!
क्या आपने दोहे लिखे हैं?
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ सर जी!
मैं- मात्राएँ नही गिनी क्या?
धुरन्धर साहित्यकार- सर गिनी तो हैं!
मैं- मित्रवर! दोहे में 24 मात्राएँ होती हैं। पहले चरण में 13 तथा दूसरे चरण में ग्यारह!
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ सर जी जानता हूँ! (उदाहरण)
( चलते-चलते थक मत जाना जी,
साथी मेरा साथ निभाना  जी।)
मैं- इस चरण में आपने मात्राएँ तो गिन ली हैं ना! 
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ सर जी! चाहे तो आप भी गिन लो!
मैं- आप लघु और गुरू को तो जानते हैं ना! 
धुरन्धर साहित्यकार- हाँ शास्त्री जी!
मैं लघु हूँ और आप गुरू है!

मैं-वाह..वाह..आप तो तो वास्तव में धुरन्धर साहित्यकार हैं!
धुरन्धर साहित्यकार- जी आपका आशीर्वाद है! 
मैं-भइया जी जिस अक्षर को बोलने में एक गुना समय लगता है वो लघु होता है और जिस को बोलने में दो गुना समय लगता है वो गुरू होता है!  
धुरन्धर साहित्यकार-सर जी आप बहुत अच्छे से समझाते हैं। मैंने तो उपरोक्त लाइन में केवल शब्द ही गिने थे! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

14 टिप्‍पणियां:

  1. itani sahaj hi aapke man me post janm leti hai ....sach me aap to Guru hai!!gyaan to sahi diya hai aapane .
    Gai Gurudev :)

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  2. सीखते सीखते सीख जायेंगे, आपसा गुरु भी मिल गया है अब तो. शुभकामनाएँ उन्हें.

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  3. शब्दों को मैं गिन सकूँ, यह मुझको नहि आय
    बिना गणित के देखिये, दोहा लिख नहि पाय.

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  4. आप का गुरूत्व आपको गुरू तो साबित करता ही है. हमने भी बहुत कुछ सीखा है आपसे

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  5. वाह बहुत खूब! बढ़िया लगा!

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  6. अद्भुत व्यंग्य!
    आपने कमाल कर दिया, शास्त्री जी!
    मज़ा आ गया - यह चैट-वार्ता पढ़कर!
    --
    याद आ गया, यह दोहा -
    सूर सूर, तुलसी ससी, अडुगन केशवदास!
    अबके कवि खद्योत सम, जहँ-तहँ करत प्रकास!!

    --
    कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "वसंत फिर आता है - मेरे लिए,
    नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा! "
    --
    संपादक : सरस पायस

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  7. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या - 2005 के आलोक में
    विषयों को एक-दूसरे से
    जोड़ने की बात चल रही है!
    --
    समीर लाल जी की टिप्पणी ने
    एक साथ गणित के
    कई सरल सवाल बनवा दिए!
    --
    उदाहरण : दोहे की मात्राओं का योगफल बताइए!

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  8. आपकी इस पोस्ट और
    समीर जी की टिप्पणी से
    प्रेरित होकर मैंने "हिंदी का शृंगार" पर
    एक पोस्ट भी लगा दी है --
    "बिना गणित के देखिए : उड़न तश्तरी"

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  9. aise hi aapko guru nhi banaya hai.........aapka shikshan sansthan isiliye to prasiddh hai.

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  10. सर, आपका अभिवादन शिरोधार्य है. भविष्य में आप से आशीष की अपेक्षा रहेगी. आप लोगों से सीख ही रही हूँ. आपकी पोस्ट सच में मार्गदर्शक है.

    उत्तर देंहटाएं

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कृपया नापतोल.कॉम से कोई सामन न खरीदें।

मैंने Napptol.com को Order number- 5642977
order date- 23-12-1012 को xelectron resistive SIM calling tablet WS777 का आर्डर किया था। जिसकी डिलीवरी मुझे Delivery date- 11-01-2013 को प्राप्त हुई। इस टैब-पी.सी में मुझे निम्न कमियाँ मिली-
1- Camera is not working.
2- U-Tube is not working.
3- Skype is not working.
4- Google Map is not working.
5- Navigation is not working.
6- in this product found only one camera. Back side camera is not in this product. but product advertisement says this product has 2 cameras.
7- Wi-Fi singals quality is very poor.
8- The battery charger of this product (xelectron resistive SIM calling tablet WS777) has stopped work dated 12-01-2013 3p.m. 9- So this product is useless to me.
10- Napptol.com cheating me.
विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
मैंने इस पर एक आलेख अपने ब्लॉग "धरा के रंग" पर लगाया था!

"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....
--
मान्यवर,
मैंने आपको चेतावनी दी थी कि यदि आप 15 दिनों के भीतर मेरा प्रोड्कट नहीं बदलेंगे तो मैं
अपने सभी 21 ब्लॉग्स पर आपका पर्दाफास करूँगा।
यह अवधि 26 जनवरी 2013 को समाप्त हो रही है।
अतः 27 जनवरी को मैं अपने सभी ब्लॉगों और अपनी फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, ऑरकुट पर
आपके घटिया समान बेचने
और भारत की भोली-भाली जनता को ठगने का विज्ञापन प्रकाशित करूँगा।
जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
इत्तला जानें।