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शुक्रवार, अगस्त 14, 2009

‘‘हिन्दू धर्म में दया और क्षमा के उच्च मानदण्ड आज भी मौजूद हैं।’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


पं0 सोमदेव जी बड़े कर्मकाण्डी बाह्मण थे।
कथा करते- करते उन्होंने अपना नाम सौम्य मुनि रख लिया था। वे कृष्ण भगवान की कथा बहुत सुन्दर करते थे।
उनकी आयु लगभग 35 वर्ष की थी, परन्तु विवाह नही किया था।
संयोगवश् एक बार उनकी कथा सुनने एक ईसाई युवती भी आ गयी। सौम्य मुनि जी की वाणी में तो सरस्वती का वास था ही। वह महिला उनसे काफी प्रभावित दिखी। अब तो अक्सर वो महिला इनकी कथा में आने लगी।
मुनि जी तो स्त्री सुख से अब तक वंचित थे ही। अतः वे भी इस युवती की तरफ आकृष्ट होते चले गये।
लोगों ने समझा कि मुनि जी इस महिला को हिन्दू धर्म में दीक्षित कर ही लेंगे। परन्तु यह क्या?
मुनि जी ने हिन्दू धर्म का चोला उतार फेंका और रातों-रात ईसाई धर्म अपना लिया। अब उनका नया नाम था- ‘‘जॉन करमेल शर्मा।
समय गुजरता रहा। मुनि जी इस महिला के पब्लिक स्कूल में ही रहने लगे थे। धीरे-धीरे मुनि जी का यौवन ढलने लगा। उन्हें भयंकर खाँसी ने जकड़ लिया। डाक्टरों ने उन्हें टी0बी0 साबित कर दी।
अपने बेड रूम में सुलाने वाली महिला ने भी इन्हें सरवेन्ट क्वाटर के हवाले कर दिया। अब ये बड़े परेशान हुए।
मौका देख कर ये इस महिला के स्कूल से खिसक लिए और अपने गृह-जनपद बिजनौर वापिस आ गये। पुराने लोंगों ने इन्हें पहचान लिया। इनके भतीजों ने इनकी कृषि की भूमि का भी हिस्सा इन्हें दे दिया।
इतना ही नही इनके एक भतीजे ने इन्हें टी0बी0 सेनेटोरिम भवाली (नैनीताल) में दाखिल करा दिया।
कुछ दिनों के बाद इनकी टी0बी0 ठीक हो गई। एक विधवा महिला ने इनसे पुनर्विवाह भी कर लिया। अब ये सुखपूर्वक अपना जीवन-यापन करने लगे हैं।
भगवान कृष्ण की कथा कहनी इन्होंने फिर शुरू कर दी है। लेकिन आज यह हिन्दू धर्म की महानता का वर्णन करते नही अघाते हैं।
अपनी कथा की शुरूआत में ये अपने जीवन की इस महत्वपूर्ण घटना को अवश्य सुनाते हैं और कहते हैं-
‘‘हिन्दू धर्म में दया और क्षमा के उच्च मानदण्ड आज भी मौजूद हैं और सदैव रहेंगे।’’

8 टिप्‍पणियां:

  1. जैनो मे तो सबसे बडा त्योहार के रुप मे क्षमा दिवस सवत्सरी को मनाया जाता है।

    आभार

    हे प्रभु यह तेरापन्थ

    मुम्बई टाईगर

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  2. दया धर्म के मूल को समझे वहीं श्रेष्ट ज्ञानी..
    मनुष्य का आभूषण है ,,दया और भाव..पर आज लोग नकली और दिखावे वाला आभूषण ज़्यादा पसंद कर रहे है..

    जन्मास्टमी की हार्दिक बधाई... स्वतन्त्रता दिवस की बधाई हो

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  3. ye hi to hamare dharam ki sabse badi khoobi hai...........bahut hi sargarbhit likha hai.

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  4. भले लोग सदा भले ही रहते है, आपकी कथा ने, पंडित जी की आपबीती ने एक बार पुनः सिद्ध कर ही दिया.
    रोचक कथा पर हार्दिक बधाई.

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  5. चलिए, जीवन संवारा तो, भले ही ठोकरे खाने के बाद.

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  6. बहुत अच्छा लिखा है आपने! एकदम सही बात बताया है!

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  7. शास्त्री जी आपने अच्छी कथा सुनाई है | धन्यवाद |

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विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
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"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....
--
मान्यवर,
मैंने आपको चेतावनी दी थी कि यदि आप 15 दिनों के भीतर मेरा प्रोड्कट नहीं बदलेंगे तो मैं
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यह अवधि 26 जनवरी 2013 को समाप्त हो रही है।
अतः 27 जनवरी को मैं अपने सभी ब्लॉगों और अपनी फेसबुक, ट्वीटर, यू-ट्यूब, ऑरकुट पर
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और भारत की भोली-भाली जनता को ठगने का विज्ञापन प्रकाशित करूँगा।
जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।
इत्तला जानें।